Tuesday, August 16, 2011

बॉलीवुड पर नए निर्माता निर्देशकों का दबदबा

पिछले चार-पांच सालों से बॉलीवुड में फिल्मों का ट्रेंड पूरी तरह बदलता हुआ नजर आ रहा है। बिलकुल नए निर्देशक और गुमनाम स्टार्स वाली फिल्में बन रही हैं और दर्शकों को बेहद पसन्द भी आ रही हैं। पुराने बरसों से जमे हुए निर्देशक जहां चुके हुए से नजर आ रहे हैं, वहीं नए, नयी सोच और अपने काम से दर्शकों को लुभा रहे हैं।

शायद यही वजह है कि सुभाष घई, महेश भट्ट, आदित्य चोपडा और करण जौहर जैसे कल के कामयाब निर्देशकों ने खुद को फिल्म मेकिंग तक सीमित कर लिया है और नए निर्देशकों के साथ फिल्में बना रहे हैं। इस बदलाव की सबसे बडी वजह यह है कि जहां जाने-माने पुराने मेकर यदि खुद किसी फिल्म का निर्देशन करते हैं तो उन्हें उस फिल्म के लिए दो साल का लम्बा अरसा देना पडता है और फिल्म चल गई, तो ठीक वरना सब कुछ गुड-गोबर हो जाता है, जबकि अलग-अलग नए निर्देशकों के साथ काम करके वे साल में दो-चार फिल्में बनाकर अच्छा खासा माल कमा लेते हैं। कुछ-कुछ होता है और कभी खुशी कभी गम के बाद जब करण जौहर ने कभी अलविदा न कहना और माई नेम इज खान में नाकामी का सामना किया, तो पहली फिल्मों में उन्हें जो दौलत और शोहरत मिली, उस पर अचानक बट्टा लग गया और उन्होंने फिल्म निर्माता बनने में ही भलाई समझी। अब तक वे निखिल आडवाणी (कल हो न हो), सोहम शाह (काल), तरूण मनसुखानी (दोस्ताना), अयान मुखर्जी (वेकअप सिड), रेंसिल डिसिल्वा (कुर्बान), पुनीत मल्होत्रा (आई हेट लव स्टोरीज) जैसे नए निर्देशक दे चुके हैं। उनकी आगामी फिल्म शॉर्ट टर्म शादी भी नए निर्देशक शकुन बत्रा निर्देशित कर रहे हैं।

करण जौहर के अभिन्न मित्र आदित्य चोपडा भी अब तक यशराज बैनर के लिए कबीर खान (न्यूयार्क), अनुराग सिंह (दिल बोले हडिप्पा), शमित अमीन (चक दे इंडिया), राकेश सिंह (रॉकेट सिंह), परमीत सिंह (बदमाश कम्पनी), प्रदीप सरकार (लागा चुनरी में दाग, लफंगे परिंदे) और मनीष शर्मा (बैंड बाजा बारात) जैसे नए निर्देशकों को अवसर दे चुके हैं। सुभाष घई और महेश भट्ट तो काफी पहले इस बात को भांप चुके थे कि एक निर्देशक के तौर पर उनकी पकड लगातार दर्शकों पर कमजोर होती जा रही है और उन्होंने खुद को सिर्फ फिल्म निर्माण तक सीमित कर नए लोगों को निर्देशक के तौर पर अवसर देना शुरू कर दिया था, लेकिन अब यह प्रवृत्ति जोर पकडती जा रही है।

वैसे स्थापित निर्देशकों द्वारा नए निर्देशकों को अवसर देने की यह परम्परा काफी पुरानी है। दिग्गज निर्देशक यश चोपडा को उनके बडे भाई बलदेव राज चोपडा ने धूल का फूल के जरिए निर्देशन का अवसर दिया था। राजेन्द्र कुमार और माला सिन्हा की जोडी वाली इस फिल्म ने अपने समय में जबरदस्त व्यवसाय किया था। इसके बाद यश चोपडा ने बी.आर. चोपडा के लिए मल्टीस्टारर फिल्म वक्त को निर्देशित किया था। स्वयं निर्देशन करते हुए यश चोपडा ने दिलीप नाइक, दीपक सरीन (आइना, जैकी श्रॉफ, जूही चावला, अमृता सिंह), नरेश मल्होत्रा (ये दिल्लगी) जैसे लोगों को अवसर दे चुके हैं। बॉलीवुड के प्रथम शो मैन स्वर्गीय राजकपूर स्वयं महान निर्देशक थे, उन्होंने भी अपने बैनर आर.के. फिल्म के लिए कुछ बाहरी निर्देशकों को मौका दिया था।

राजकपूर ने अपनी फिल्मों के छायाकार राधू कर्माकर को बतौर निर्देशक जिस देश में गंगा बहती है के जरिए बॉलीवुड से परिचित कराया था। इसी तरह उन्होंने अपने सहायक निर्देशक राहुल रवैल को बतौर निर्देशक बीवी ओ बीवी में निर्देशन का मौका दिया था। राजकपूर ने अपने बडे बेटे रणधीर कपूर को भी निर्देशन का मौका दिया और अपने पिछले दो निर्देशकों की तरह उन्होंने उनकी फिल्म में भी काम किया। रणधीर कपूर ने राजकपूर के लिए कल आज और कल, धरम करम और राजकपूर की मृत्यु के बाद हिना का निर्देशन किया था। महेश भट्ट ने अपने बैनर तले विक्रम भट्ट को बतौर निर्देशक पेश किया था। अपनी खोज राहुल राय के साथ बेटी पूजा भट्ट को लेकर उन्होंने विक्रम भट्ट से जनम नामक फिल्म निर्देशित करवाई थी। जनम तो असफल रही थी लेकिन विक्रम भट्ट को जरूर बतौर निर्देशक स्थापित करने में सफल हुई थी। विक्रम भट्ट को पहली बडी कामयाबी मिली महेश भट्ट के लिए राज नामक फिल्म निर्देशित करके। 2003 में आई इस हॉरर फिल्म ने कामयाबी का नया इतिहास लिखा था। आज विक्रम भट्ट स्वयं अपना प्रोडक्शन हाउस खोल चुके हैं और अब वे अपने बैनर तले नए निर्देशकों से फिल्में निर्देशित करवा रहे हैं।

बॉलीवुड के मिस्टर परफैक्सनिस्ट आमिर खान ने लगान के जरिए बतौर निर्माता फिल्म निर्माण प्रारम्भ किया। आमिर पटकथा लेखक के तौर पर कुछ फिल्मों में हाथ आजमा चुके थे और निर्देशन में भी उनकी रूचि थी लेकिन पहली फिल्म में स्वयं निर्देशन न करके उन्होंने लगान का निर्देशन इसके लेखक आशुतोष गोवारिकर से करवाया। आशुतोष इससे पहले आमिर खान के साथ बाजी में काम कर चुके थे। इसके बाद आमिर खान ने अपने बैनर तले कुछ फिल्में बनाई हैं जिनमें उन्होंने नए-नए निर्देशकों अभिनव देव, किरण राव, अनुष्का रिजवी, अब्बास टायरवाला, अमोल गुप्ते (क्रिएटिव निर्देशक) और स्वयं को तारे जमीं पर के जरिए बॉलीवुड से परिचित कराया है। आजकल बॉलीवुड में अभिनेता-अभिनेत्रियों का काम करते हुए स्वयं का बैनर स्थापित करने की होड लगी हुई है। नायकों में जहां शाहरूख खान, संजय दत्त, अक्षय कुमार, आमिर खान, अरशद वारसी, अजय देवगन, अनिल कपूर, सन्नी देओल, अरबाज खान, सलमान खान, गोविन्दा आदि अभिनय के साथ-साथ फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं, वहीं नायिकाओं ने भी अब इस फील्ड में अपना करियर संवारना शुरू कर दिया है।

पूर्व मिस यूनीवर्स सुष्मिता सेन ने अपने बैनर तले झांसी की रानी बनाने की घोषणा की, लेकिन यह फिल्म मुहूर्त शॉट से आगे नहीं बढ सकी। मिस इंडिया और मिस यूनिवर्स (2000) रही अभिनेत्री लारा दत्ता ने राजकंवर की फिल्म अंदाज (2003) से हिन्दी फिल्मों में प्रवेश किया था, ने 2010 में अपना बैनर स्थापित किया और अपने पति महेश भूपति को शादी के बाद उसमें साझेदार बनाकर 2011 गर्मियों में चलो दिल्ली नामक फिल्म बनाकर दर्शकों के सामने पेश कर दी। अब वे एक बच्चे की मां बनने जा रही हैं, जिस कारण से कुछ समय के लिए उन्होंने बतौर निर्माता छुट्टी ले रखी है। इसी तरह से अभिनेत्री दीया मिर्जा ने ऋतिक रोशन के साले जाएद खान और अपने मित्र सोहेल सिंह के साथ फिल्म निर्माण शुरू किया है। दीया मिर्जा इन दिनों अपने बैनर तले तीन फिल्मों के निर्माण में व्यस्त हैं। इन तीनों में वे स्वयं नायिका बनकर आ रही हैं। फिल्मों में बिलकुल हटकर किरदार निभाने वाली अभिनेत्री नंदिता दास ने अपने लिए जहां अभिनय का रास्ता चुना, वहीं उन्होंने इस लाइन में काम करते हुए निर्देशक के कुर्सी पर बैठना पसन्द किया और अपने निर्देशन में बनाई पहली फिल्म फिराक के जरिए बॉलीवुड में एक सफल और मंझे हुए निर्देशक के तौर पर अपनी धाक जमाई।

गोधरा कांड के बाद गुजरात में अल्पसंख्यक समुदाय में जिस तरह के अत्याचार हुए उन्हीं को आधार बनाकर उन्होंने फिराक का निर्देशन किया था। बॉलीवुड के ड्रीम गर्ल खिताब से नवाजी जा चुकी अभिनेत्री हेमा मालिनी ने अपने बैनर को फिर से शुरू किया है और वे इस बैनर तले अपनी बेटी ईशा को बॉलीवुड से फिर से परिचित कराने जा रही हैं। टेल मी ओ खुदा नामक फिल्म में वे अपने पति धर्मेन्द्र के साथ-साथ सलमान खान को भी निर्देशित करेंगी। बॉलीवुड की बबली गर्ल प्रीति जिंदा ने अभिनेत्री के तौर बॉलीवुड को कई अच्छी फिल्में दीं। दर्शकों में उन्होंने चुलबुली लडकी की इमेज बनाई जिसे लम्बे समय तक उन्होंने बरकरार रखा। अचानक उनकी जिन्दगी में नेस वाडिया नामक व्यक्ति का प्रवेश हुआ और वे उनके साथ रोमांस करते हुए फिल्मी परदे से काफी दूर चली गई। फिल्मी परदे से दूर करने में उनके क्रिकेट प्रेम का भी हाथ रहा। उन्होंने फटाफट क्रिकेट के नए तमाशे में अपनी किस्मत को आजमाना चाहा और आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब नामक क्रिकेट टीम को खरीद लिया। पिछले तीन सीजन से वे आईपीएल में इस कदर डूबी रहीं कि उनका फिल्म करियर पूरी से बर्बाद हो गया और उनके प्रेमी नेस वाडिया से भी उनका ब्रेकअप हो गया। जिन्दगी के दोहरावे पर खडी इस अभिनेत्री को बॉलीवुड ही ऎसा स्थान लगा जहां पर वे फिर से अपनी जिन्दगी की शुरूआत कर सकती थीं।

लेकिन अब तक बॉलीवुड में इतने नए चेहरे नायिकाओं के रूप में आ चुके थे कि निर्माताओं ने प्रीति जिंटा की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। बॉलीवुड के निर्माता निर्देशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए प्रीति जिंटा ने अपना स्वयं का बैनर स्थापित किया है और वे लव इन पेरिस नामक फिल्म से बतौर अभिनेत्री और निर्मात्री के रूप में बॉलीवुड में वापसी करने जा रही हैं। कहो न प्यार है और गदर : एक प्रेम कथा नामक दो जबरदस्त फिल्मों से अपना फिल्मी सफर शुरू करने वाली अभिनेत्री अमीषा पटेल भी आजकल निर्माण के क्षेत्र में उतर गई हैं। अमीषा पटेल को फिल्म निर्माता बनने की प्रेरणा देने का काम सलमान खान ने किया था। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच पर सलमान खान ने अमीषा से कहा था कि जब करियर ढलान पर हो तो निर्माता के रूप में सामने आना चाहिए। इससे परदे पर वापस आने का ज्यादा मौका मिलता है। अमीषा पटेल ने इसी बात को गांठ बांधते हुए अपना बैनर लांच किया और उन्होंने दो फिल्मों को एक साथ फ्लोर पर ले जाने का फैसला किया है। अमीषा पटेल ने एक निर्णय अन्य नायिकाओं लारा दत्ता, प्रीति जिंटा, सुष्मिता से अलग लिया है और वह यह कि उन्होंने अपनी फिल्मों के लिए बॉलीवुड के जाने माने निर्देशकों को साइन किया है।

अभी तक उन्होंने जिन दो निर्देशकों को लिया है वे हैं डेविड धवन और प्रियदर्शन। यह दोनों सुपर निर्देशक हास्य फिल्मों के महारथी हैं। अमीषा को इन दोनों पर इतना भरोसा है कि इनके साथ वे फिर से अभिनेत्री के तौर पर फिल्मों में वापसी करेंगी और उनका प्रोडक्शन हाउस भी सफलता प्राप्त कर लेगा। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन दिनों कार्पोरेट जगत को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अभिनेता अभिनेत्रियों से कडी प्रतियोगिता करनी पड रही है। कार्पोरेट जगत द्वारा बनाई जा रही फिल्में जहां असफल हो रही हैं वहीं इन अभिनेता अभिनेत्रियों द्वारा बनाई जा रही कम लागत की फिल्मों को दर्शकों का बेपनाह प्यार मिल रहा है। इन फिल्मों की सफलता उनके भारी भरकम बजट पर भारी पड रही हैं। देखना की बात यह है क्या-क्या धीरे-धीरे निर्माण के क्षेत्र में कदम रखने वाले अभिनेता अभिनेत्रियां कार्पोरेट जगत की हस्तियों को इस क्षेत्र से बाहर कर देंगी। इस बारे में हां या ना कहना अभी जल्दबाजी होगी। हम सिर्फ पुरानी कहावत तेल देखो और तेल धारा देखो के अनुसार सिर्फ इंतजार कर सकते हैं।

-राजेश कुमार भगताणी

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