Wednesday, July 13, 2011

परिणीता से डर्टी पिक्चर तक : विद्या बालन

बॉलीवुड में नायिकाओं का सफर बेहद सीमित माना जाता है। दर्शकों की नजर में चढने वाली अभिनेत्री ज्यादा से ज्यादा 8 या 10 साल के लिए आती है। इस दौरान उसे शुरूआती सफलता के बाद लगातार असफलता का मुंह देखना पडता है और फिर जाकर उसे कोई ऎसा किरदार मिलता है जिससे उसे प्रसिद्धि मिलती है। इसके बलबूते पर वह अपने करियर के कुछ और साल गुजार लेती है। वर्तमान में बॉलीवुड नायिकाओं में विद्या बालन ऎसा नाम है जिसने अपनी पहली हिन्दी फिल्म परिणीता से दर्शकों में ऎसी छवि बनाई है जिसमें भारतीयता की झलक नजर आई। विधु विनोद चोपडा की प्रदीप सरकार द्वारा निर्देशित परिणीता बंगाल के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र के उपन्यास परिणीता पर आधारित थी। इस उपन्यास पर पहले भी दो फिल्में बन चुकी थीं।

बरसों पूर्व जितेन्द्र और सुलक्षणा पंडित को लेकर बनी परिणीता को दर्शकों ने काफी पसन्द किया था। अरसे बाद फिर से परदे पर उतरी परिणीता को इस बार भी दर्शकों ने अपनी आंखों में बसाया। इन दिनों विद्या बालन मीडिया के हर रूप में चर्चा पा रही हैं। इस चर्चा की वजह बनी है एकता कपूर द्वारा निर्मित और मिलन लूथरिया द्वारा निर्देशित डर्टी पिक्चर। दक्षिण भारत की सेक्स बम के नाम से मशहूर रही अभिनेत्री सिल्क स्मिता के जीवन पर आधारित यह फिल्म अपनी घोषणा के वक्त से ही चर्चा में है। जहां इस फिल्म को एकता कपूर के कारण चर्चा मिल रही है वहीं इस फिल्म में विद्या बालन के कारण भी चर्चा मिल रही है। इस फिल्म के लिए विद्या बालन ने अपने कूल्हों की सर्जरी तक करवाने का विचार किया था, लेकिन फिर उन्होंने नकली पैड्स के जरिए अपने कूल्हों की साइज को विस्तार दिया है। इस किरदार को जीवंत बनाने के लिए विद्या कोई कसर बाकी नहीं रख रही है।

परिणीता के रूप में आई विद्या बालन दर्शकों की आंखों में मोनालिसा की तरह बस गई। इस फिल्म के बाद विद्या की चर्चा तो होती थी लेकिन कोई अच्छा किरदार उनको नहीं मिल पा रहा था। उनकी अभिनय क्षमता को फिर से विधु विनोद चोपडा ने एक नए निर्देशक राजकुमार हिरानी के हाथों संवारा लगे रहो मुन्नाभाई में। यह राजकुमार हिरानी की मुन्नाभाई एमबीबीएस का अगला भाग या सीक्वल नहीं था बल्कि हिरानी ने मुन्नाभाई को ब्रांड बनाकर पेश किया था। 2006 में प्रदर्शित हुई यह फिल्म उस साल की सर्वाधिक हिट फिल्मों में दूसरे नम्बर पर थी। 2007 जनवरी में आई मणिरत्नम की गुरू ने विद्या बालन को नई पहचान दी। इस फिल्म में उन्होंने विकलांग युवती की भूमिका को जिस सहजता और विश्वसनीयता के साथ परदे पर उतारा वह तारीफे काबिल था। छह साल के करियर में विद्या बालन के लिए 2007 विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। इस वर्ष उनकी जहां गुरू में तारीफ हुई वहीं उनकी फिल्म हे बेबी ने भी बाक्स ऑफिस पर अच्छा व्यवसाय किया।
हालांकि इस फिल्म में उनके पहनावे को लेकर बॉलीवुड की अन्य नायिकाओं के मध्य खासी चर्चा रही। कहा जा रहा था कि विद्या बालन में डे्रस सेंस नहीं है। यह वास्तविकता भी थी। हे बेबी में वे पश्चिमी परिधान में बेतरतीब नजर आई थीं। इसके बाद इसी साल आई प्रियदर्शन की भूलभुलैया ने विद्या बालन के अभिनय को नये अंदाज के साथ परदे पर उतारा। पूर्ण रूप से भारतीय मूरत में आई इस नायिका ने फिल्म के कई दृश्यों में शरीर में समाई आत्मा के दृश्यों में अपने चेहरे पर भावाभिव्यक्ति से दर्शकों की वाहवाही लूटी।
हालांकि इसी वर्ष निखिल अडवाणी के निर्देशन में आई सलाम-ए-इश्क में जॉन अब्राहम के साथ उनकी कैमिस्ट्री रील लाइफ से निकलकर कुछ समय के लिए रीयल लाइफ में चली गई थी। जॉन अब्राहम के साथ विद्या के सम्बन्धों ने बिपाशा बसु की नींद उडा दी थी। कुछ समय तक चला यह अफेयर बिना किसी शोर शराबे ब्रेकअप में बदला। बीता साल 2010 विद्या बालन के करियर में स्वर्ण युग की तरह रहा है। इस वर्ष उनकी दो फिल्में परदे पर आई और इन दोनों ही फिल्मों में अपने सहज अभिनय से उन्होंने दर्शकों के साथ समालोचकों तक को चौंका दिया। फिल्म ट्रेड के जो लोग विद्या के लिए कहते थे कि वह सीधी सादी गांव की बहनजी जैसी लगती है, इश्किया में उनकी भूमिका को देख न केवल चौंके बल्कि बॉलीवुड को विद्या द्वारा दी गई नई सैक्स इमेज को लेकर बडे-बडे बयान दिए।

विशाल भारद्वाज निर्मित और अभिषेक चौबे निर्देशित इश्किया में उन्होंने अपनी काली कजरारी आंखों, लम्बोतर चेहरे और सुतवां नाक के साथ जो भाव दिए वे तारीफे काबिल थे। पूरी फिल्म में सीधे पल्लू की साडी पहनकर भी उन्होंने जिस अंदाज में सेक्स को प्रदर्शित किया वह उन अभिनेत्रियों के लिए एक सबक था जो बदन दिखाने को ही अपनी सेक्स छवि मानती हैं।विशाल भारद्वाज इश्किया का सीक्वल बनाने जा रहे हैं लेकिन अफसोस इसमें उन्होंने विद्या बालन को कोई किरदार नहीं दिया है। एक तरफ जहां इश्किया से उनकी छवि सेक्सी महिला की बनी वहीं अमिताभ बच्चन अभिनीत और निर्मित पा में उन्होंने कत्तüव्यनिष्ठ डाक्टर मां की भूमिका को जिस संजीदा तरीके से निभाया वह अपने आप में एक मिसाल बना।

एक मां, जो यह जानती है कि उसका बच्चा कभी भी इस दुनिया को अलविदा कह सकता है, के बाद भी अपनी कत्तüव्यपरायणता में कोताही नहीं बरतती है। इस फिल्म के लिए जहां अमिताभ बच्चन को पुरस्कार मिले वहीं विद्या बालन ने भी अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। एकता कपूर ने विद्या बालन को इश्किया में देखने के बाद ही अपनी फिल्म डर्टी पिक्चर की नायिका के लिए चुना। उन्हें पूरा विश्वास है कि नायिका की शक्ल में जिस तरह का ग्लैमर उन्हें परदे पर दर्शाना है उसके लिए विद्या बालन से बढकर कोई नहीं है।
राजेश कुमार भगताणी

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