आमिर खान की "पीपली लाइव" भारत की ओर से ऑस्कर पुरस्कारों के लिए आधिकारिक तौर पर भेजी जाने वाली फिल्म के रूप में चुन ली गई है। आमिर कहते हैं कि ऑस्कर पुरस्कारों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए विशेष सम्मान की बात है। आमिर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहा है, ""जब मैंने सुना कि "पीपली लाइव" ऑस्कर में भारत के प्रतिनिधित्व के लिए चुनी गई है तो मुझे वास्तव में बहुत खुशी हुई। मेरे लिए वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना हमेशा से विशेष सम्मान की बात रही है और "फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया" (एफएफआई) ने मुझे यह अवसर दिया इसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं।"" "पीपली लाइव" किसानों की आत्महत्या पर एक राजनीतिक व्यंग्य है। यह पूर्व पत्रकार अनुशा रिज्वी के निर्देशन में बनी पहली फिल्म है। आमिर ने कहा है कि वह अनुशा और फिल्म से जु़डे सभी लोगों को बधाई देते हैं। ऎसा तीसरी बार हुआ है कि ऑस्कर पुरस्कारों में भेजने के लिए एफएफआई ने एक ऎसी फिल्म चुनी है जो किसी न किसी तरह से आमिर जु़डी है। सबसे पहले 2001 में आशुतोष गोवारिकर की फिल्म "लगान" का ऑस्कर में विदेशी फिल्मों के वर्ग में अंतिम पांच सर्वश्रेष्ठ फिल्मों चयन हुआ था। आमिर इस फिल्म के मुख्य अभिनेता थे। वैसे इस फिल्म को पुरस्कार नहीं मिल सका था और "नो मैंस लैंड" ने बाजी मार ली थी। वर्ष 2008 में आमिर के निर्देशन में बनी और उनके अभिनय से सजी फिल्म "तारे जमीन पर" ऑस्कर पुरस्कारों के लिए भेजी गई थी लेकिन यह फिल्म अंतिम पांच में जगह नहीं बना सकी थी।
Saturday, September 25, 2010
ऑस्कर में भारत की नुमांइदगी विशेष सम्मान की बात : आमिर
Friday, August 13, 2010
आमिर करना चाहते थे नत्था का रोल
आमिर खान अपनी बहुचर्चित फिल्म पीपली लाइव में प्रमुख किरदार निभाना चाहते थे लेकिन ऑडिशन में दमदार प्रदर्शन से ओमकार दास माणिकपुरी सुपरस्टार से यह रोल झटक ले गए। निर्देशक अनुषा रिजवी ने इस नए कलाकार का छोटे से रोल के लिए ऑडीशन लिया था लेकिन अंतत: आमिर की जगह ओमकार ने फिल्म को लीड किया।
ओमकार ने बताया, "आमिरजी और अनुषाजी ने मेरा ऑडिशन देखा और मुझे बताया, ओमकारजी मैं नत्था का किरदार निभाना चाहता था लेकिन मैं आपकी परफोरमेंस देख कर बहुत प्रभावित हुआ। केवल आप ही नत्था का किरदार निभा सकते हैं। यह मेरी जिंदगी का सबसे ज्यादा खुशी का दिन था।"
छत्तीसगढ़ के ब्रिंदानगर गांव के निवासी 40 वर्षीय ओमकार को पहली बार नुक्क़ड नाटक में अभिनय करते नाटककार हबीब तनवीर ने देखा था। तनवीर ओमकार व उनके गांव के दो लोगों को भोपाल स्थित अपने "नया थियेटर" में ले आए। पांचवी कक्षा तक पढ़े ओमकार ने बताया, जब मैं 17 साल का था मैंने गांव की अपनी मंडली में लोकगीत गाने शुरू किए। मैंने शिक्षा के बारे में आयोजित नुक्क़ड नाटकों में भाग लेना भी शुरू कर दिया। हम गांव-गांव जाते और नुक्क़ड नाटक खेलते। 200 गांवों में नुक्क़ड नाटक खेलने पर हमने एक समारोह आयोजित किया। समारोह में हबीबजी मुख्य अतिथि के तौर पर आए। तब उन्होंने मुझे अभिनय करते देखा और मुझे अपने ग्रुप में काम करने का प्रस्ताव दिया।
ओमकार के तीन बच्चे व परिवार अभी भी गांव में ही हैं और टीवी देखते रहते हैं। जब भी वे इस फिल्म के प्रोमोस में मुझे देखते हैं मुझसे फोन पर बात करते हैं। मेरे बच्चे बहुत खुश हैं। मैं फिल्म के बारे में काफी उत्सुक हूं। अपने परिवार में पहला अभिनेता हूं इसलिए मुझे इतनी ब़डी फिल्म में देखकर वे बहुत खुश हैं।
आमिर द्वारा निर्देशित फिल्म गांवों व शहर के बीच चौ़डी होती खाई तथा किसानों के आत्महत्या जैसे मुद्दों को दर्शाती है। ओमकार का राजनीति से दूर दूर तक कोई लेना-दोना नहीं है लेकिन किसानों के आत्महत्या करने के मुद्दे पर उनकी सोच स्पष्ट है। एक श्रमिक के पुत्र ओमवार सवाल करते हैं कि अगर किसान खेती करना बंद कर देंगे तो शहरी लोगों का क्या होगा। वे क्या खाएंगे। गांवों की बुरी हालत है। वे लोग गरीब हैं और महंगाई ने हालात और खराब कर दिए हैं। अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए वे कहते हैं कि अगर प्रस्ताव आते हैं तो वे फिल्मो में काम करना जारी रखेंगे।