राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बॉलीबुड अभिनेता अर्जुन रामपाल का कहना है कि प्रकाश झा द्वारा निर्देशित फिल्म "राजनीति" में उनकी अब तक की सबसे कठिन भूमिका है। "राजनीति" में अर्जुन अभिनेता रणबीर कपूर के "ब़डे भाई" के रूप में नजर आएंगे।
अर्जुन ने बताया, ""मैंने "राजनीति" में परंपरागत "ब़डे भ्ौया" का किरदार नहीं किया है। यह मेरे करियर की सबसे कठिन भूमिका है।"" अर्जुन ने कहा, ""फिल्म में मेरा किरदार एक सनकी और गुस्सैल आदमी का है। यह किरदार कुछ भी कर सकता है। उसका छोटा भाई पढ़ाई करने के लिए विदेश गया होता है। मेरा किरदार भारत में ही रहता है और अपनी अप्रत्याशित दुनिया बनाता है।""
अर्जुन के मुताबिक, ""मेरे करियर को "रॉक ऑन" ने एक नया आयाम दिया है, इसकी बदौलत मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। "राजनीति" में मेरी भूमिका बिल्कुल अलग है। इसको लेकर एक और राष्ट्रीय पुरस्कार के बारे में सोचा जा सकता है।""
Wednesday, April 7, 2010
मेरे करियर की सबसे कठिन भूमिका है राजनीति में: रामपाल
Wednesday, January 27, 2010
अवॉर्ड की खुशी में पार्टी
जब से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा हुई है, तब से सम्मान पाने वाले अदाकार अपने-अपने तरीकों से खुशियों का इजहार किए जा रहे है। फिल्म रॉकऑन के लिए अर्जुन रामपाल को सपोर्टिग मेल अभिनेता का अवार्ड मिला है। जबकि उनकी खुशी में शामिल हुए दोस्तों में फरहान अख्यर, प्राची देसाई के अलावा शाहरूख खान और कैटरीना कैफ भी थे।
पार्टी में फराह खान शाहरूख से गप्पे मारते हुए दिखी। पार्टी में धमाल करने के लिए सैफ अली खान और करीना कपूर भी आए थे। करिश्मा कपूर भी मौजूद थी।
Monday, December 14, 2009
धीरे-धीरे सब छोड रहे है शाहरूख का साथ
बॉलीवुड के बादशाह शाहरूख खान को धीरे-धीरे सब छोड रहे हैं, वह अब अकेले पड गए हैं। बॉलीवुड का बादशाह कैंप अब कमजोर पडता जा रहा है।
इसके कई सबूत हैं
पहला सबूत है- सलमान के चैरिटेबल ऑर्गेनाइजेशन "बिंग ह्यूमन" के लिए बॉलीवुड के सभी बडे सितारे एक साथ रैंप पर आए लेकिन किसी ने शाहरूख को नहीं बुलाया।
दूसरा सबूत है- हमेशा शाहरूख के साथ फिल्म बनाने की बात कहने वाली फरहा खान ने अपने पति शिरीश कुंदूर की फिल्म से शाहरूख का पत्ता काटकर अक्षय को साइन किया।
तीसरा सबूत है- "पा" के प्रीमियर के दौरान शाहरूख और करण जौहर ने एक दूसरे की तरफ देखा तक नहीं। ये भी खबर आई है कि शाहरूख और करण जौहर भी दूर हो चुके हैं।
चौथा सबूत हैं- शाहरूख के बेहद करीबी माने जाने यशराज प्रोडक्शंस के आदित्य चोपडा ने भी अब शाहरूख से किनारा कर लिया हैं। अपनी अगली फिल्म की कामयाबी के लिए उन्होंने शाहरूख की बजाय हिट एंड हैपनिंग रणबीर कपूर को चुना।
पाचवां सबूत है- "तीस मार खान" वाले विवाद से खफा होकर शाहरूख नहीं पहुंचे फराह के लाउंजरी शो मे। इस शो में बॉलीवुड का हर बडा नाम पहुंचा लेकिन शाहरूख इनविटेशन के बावजूद नहीं आए।
अब शाहरूख के कैंप में अर्जुन रामपाल और जूही चावला को मिलाकर सिर्फ कुछ गिने चुने लोग ही बचे हैं।
Saturday, September 5, 2009
नही दिखा "फॉक्स"
संगीत: मोंटी शर्मा
कलाकार: सनी देओल, अर्जुन रामपाल, सागरिका घाटगे, उदिता गोस्वामी
समीक्षा: आमतौर पर फिल्मों में रहस्य का ताना-बाना तो अच्छी तरह बुन लिया जाता है, लेकिन जब रहस्य पर से परदा उठता है, तो लेखक ऎसे तर्क और घटनाक्रम सामने रखता है, जो तर्कसंगत नही लगते और मामला टॉय-टॉय फिस्स हो जाता है। निर्देशक दीपक तिजोरी की फिल्म "फॉक्स" के साथ भी यही समस्या है। अर्जुन कपूर(अर्जुन रामपाल) एक वकील है, जो पैसों की खातिर उन लोगों को बचाता है, जो दोषी है। वकालत उसके लिए मात्र व्यवसाय है। आखिर उसका जमीर जगता है, और वह वकालत से ब्रेक लेकर मुंबई से गोआ चला जाता है। एक मुलाकात के दौरान एक बूढा आदमी अर्जुन को अपना उपन्यास पढने को देता है। अर्जुन को उपन्यास बहुत रोचक लगता है। अगले दिन वह उसे लौटाने जाता है, लेकिन उसे पता चलता है कि वह वृद्ध इस दुनिया में नही रहा। अर्जुन अपने नाम से उस उपन्यास को पब्लिशर सोफिया(उदिता गोस्वामी)की मदद से छपवाता है।
उपन्यास बेहद सफल रहता है, और अर्जुन की ख्याति और बढ जाती है। एक दिन पुलिस ऑफिसर यशवंत देशमुख (सनी देओल) अर्जुन से पूछता है कि क्या उपन्यास उसने लिखा हैक् अर्जुन के हां कहने पर उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है, क्योंकि उपन्यास में वर्णित घटनाक्रम पांच मर्डर केस से संबंघित है। उपन्यास में इन हत्याओं का इतनी बारीकियों से वर्णन किया गया कि अर्जुन को ही हत्यारा समझ लिया जाता है। कैसे अर्जुन अपने आपको बेगुनाह साबित करता है, ये फिल्म का सार है। फिल्म की शुरूआत मे अर्जुन के जमीर जागने और वकालत से ब्रेक लेने के घटनाक्रम को जरूरत से ज्यादा फुटेज दिया गया है। इंटरवल से कुछ देर पहली सनी देओल की एंट्री और अर्जुन रामपाल के गिरफ्तार होने के बाद उम्मीद जागती है, कि आगे कुछ दिलचस्प देखने को मिलेगा। लेकिन इसके बाद कहानी को ठीक तरह से दीपक तिजोरी विकसित नही कर सके। कहानी को पूरा करने के लिए उन्होंने तर्क-वितर्कों को परे रखकर फिल्म के नाम पर खूब छूट ले ली। सनी देओल का किरदार भी ठीक से नही लिखा गया है।
उन्हें अक्खड व्यक्ति दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन कई बार वे उदार निकले और अपने दुश्मन की उन्होंने मदद भी की। निर्देशक के रूप में दीपक तिजोरी ने फिल्म को आघुनिक लुक देने की कोशिश की है। इस वजह से अंग्रेजी के कई संवादों का इस्तेमाल किया गया है, और किरदारों की लाइफस्टाइल हाईफाई रखी गई है। अर्जुन रामपाल का अभिनय औसत है, और उनके द्वारा बोले गए कुछ संवाद अघूरे लगते है। सनी देओल ने नियंत्रित अभिनय किया है। सागरिका घाटगे के मुकाबले उदिता गोस्वामी बेहतर रही। कुल मिलाकर फॉक्स एक औसत फिल्म है।
Monday, August 31, 2009
अर्जुन रामपाल के "लैप" रेस्त्रा का उद्धाटन
मंदी के दौर में फिल्मी सितारों का दूसरे बिजनेस में इन्वेस्ट करना कोई नई बात नही है। ऎसे में अर्जुन रामपाल कहां पीछे रहते। बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल ने "लैप" नाम का एक रेस्त्रां दिल्ली के फाइव स्टार होटल अशोका के साथ मिलकर खोला है।
उद्धाटन के मौके पर बॉलीवुड के ढेरों सितारों ने शिरकत की। इनमें शाहरूख खान, इमरान खान, अभय देओल, डीनो मोरिया और करण जौहर भी शामिल थे। शाहरूख के अलावा रितिक रोशन भी अपनी पत्नी सुजैन के साथ आएं। वहीं इमरान खान अपनी गर्लफ्रेंड अवंतिका के साथ तशरीफ लाए। सभी ने अर्जुन को उनके इस काम के लिए बघाई दी।
अर्जुन के पार्टनर ए.डी.सिंह का कहना है कि अर्जुन के बॉलीवुड कनेक्शन के चलते "लैप" जल्द ही लोगों के बीच लोकप्रिय हो जाएगा। वहीं उद्धाटन समारोह तो इतनी तवज्जों मिलने से अर्जुन को भी कामयाबी की भरपूर उम्मीद नजर आ रही है।