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Monday, July 27, 2009

"लक" का लक खराब

Luck निर्माता: ढिलिन मेहता
निर्देशक: सोहम शाह
संगीत: सलीम-सुलैमान
कलाकार: संजय दत्त, इमरान खान, श्रुति हासन, मिथुन चक्रवर्ती, डैनी, रवि किशन, रति अगि्नहोत्री, चित्रांशी

समीक्षा: सोहम शाह की फिल्म "लक" एक इंसान के भाग्य पर आघारित है। जिसमें इंसान के आसपास कई समस्याएं घिरी होती है, और दो इंसान एक-दूसरे के लिए समस्याएं पैदा करता है। फिल्म में मानव की सही जीवन शैली को दिखाने की कोशिश की गई है। "लक" भी "घूम" की तरह थोडी पकाऊ है, लेकिन हर बार देखने पर मजा भी आएगा। जिस तरह टीवी पर "बिग बॉस" नुमा कुछ रियलिटी शो दिखाए जाते है जिनमें लोगों को टॉस्क दिए जाते है और कौन शो में रहेगा और कौन नही, इसका फैसला दर्शक करते है, उसी तरह का शो लक फिल्म का मूसा भी आयोजित करता है। फर्क इतना है कि उसके खेल में भाग लेने वाले एक-एक कर मारे जाते है, और जो भाग्यशाली होते है, वो बच जाते है। मूसा "लक" का व्यापार करता है और भाग्यशाली लोगों को वो उठाकर अपने खेल का हिस्सा बना लेता है। लोग इस बात पर पैसा लगाते है कि कौन जिंदा बचेगा।

मूसा लोगों की किस्मत से तरह-तरह से खेलता है। हेलिकॉप्टर में वह सभी को बैठा कर हजारों फीट ऊपर ले जाता है और कूदने को कहता है। तीन पैराशूट ऎसे है, जो खुलेंगे नही। बदकिस्मत मारे जाते है, और किस्मत वाले बच जाते है। जो बचे वे अगले रांउड में फिर जिंदगी और मौत के खेल मे अपना "लक" आजमाते है।
निर्देशक और लेखक सोहम की कहानी का मूल विचार अच्छा है। उसमें नयापन है। वे टीवी पर दिखाने वाले शो को फिल्म में ले आए और उसे लार्जर देन लाइफ का रूप दे दिया, लेकिन कहानी का वे ठीक से विस्तार नही कर पाएं वरना एक अच्छी फिल्म बनाई जा सकती थी। ट्रेन सीक्वेंस के साथ फिल्म की बेहतरीन शुरूआत होती है।

नए-नए किरदार कहानी में जुडते जाते है और कहानी आगे बढती है। उम्मीद बंघती है कि एक अच्छी फिल्म देखने को मिलेगी, लेकिन जल्दी ही फिल्म अपनी दिशा खो बैठती है। मूसा इन लोगों के साथ जिंदगी और मौत के जो खेल खेलता है, वो दिलचस्प नही है कि दर्शकों को बांघकर रखे। एकरसता होने की वजह से फिल्म ठहरी हुई लगती है।
रोमांस और इमोशन पैदा करने की कोशिश की गई है, लेकिन वो जबरदस्ती ठूंसे हुए और बनावटी लगते है। फिल्म का अंत भी हास्यास्पद है। मूसा की अंतिम चुनौती में विजयी होकर राम (इमरान खान) 20 करोड रूपए जीत जाता है। इसके बावजूद वो मूसा के साथ एक और खेल खेलता है। क्यों इसका कोई जवाब नही है। दोनों एक-दूसरे को गोली मार देते है। इसके बाद अस्पताल वाले दृश्य देखकर लेखकों की अक्ल पर हंसी आती है। श्रुति हासन के डबल रोल वाली बात का कोई मतलब नही है। फिल्म में थोडा भ्रम है, लेकिन इतने अभिनेता होने से फिल्म मे रोमांच होना स्वाभाविक है।
फिल्म "लक" के डायलॉग बेहतरीन है। इसके एक संवाद "मुझे पैसों की नही, तुझ जैसों की जरूरत है और मैं खरीदता नही, सिर्फ भाडे पर लेता हूं" ने पूरी फिल्म में जान डाल दी है।

Friday, July 17, 2009

इमरान कॉमेडी फिल्म करना चाहते है

Imran Khan

मामा आमिर खान भले ही फिल्म प्रोजेक्ट शुरू करने के पहले गंभीर शोघ के लिए जाने जाते हो लेकिन भांजे इमरान खान का कहना है कि किस फिल्म में काम करना है किसमे नहीं इस बात का फैसला वह अपने मूड के हिसाब से करते है। कालेज रोमांस पर बनी फिल्म "जाने तू या जाने ना" में भूमिका के बाद 25 वर्षीय अभिनेता अपने रोमांटिक छवि के लिए चर्चित हो गए थे। खान ने कहा फिल्मों में काम करना या ना करना मेरे मूड पर निर्भर करता है। अलग-अलग भूमिकाएं करने से मेरे भीतर के अभिनेता को चुनौती मिलती है। इमरान ने कहा कि लगातार "किडनैप" और "लक" जैसी एक्शन फिल्में करने के बाद वह किसी हल्की-फुल्की फिल्म में काम करना पसंद करेंगे।

Friday, July 10, 2009

देसी जैक्सन बने इमरान खान

Imran Khan

बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान अपनी आने वाली फिल्म "लक" के एक गाने में दिवंगत पॉप स्टार माइकल जैक्सन जैसी वेशभूषा पहने थिरकते हुए नजर आएंगे। सोहम शाह निर्देशित फिल्म "लक" में इमरान और अभिनेत्री श्रुति हसन पर फिल्माया गया गाना "जी ले" में काफी हद तक माइकल जैक्सन के सुपरहिट गाने "बिट इट" के वीडियों की झलक मिल रही है। इतना ही नही इस गाने में इमरान ने भी वैसी ही काली जींस और लाल जैकेट पहनी है जैसी जैक्सन ने अपनी एलबम "बिट इट" में पहनी थी। इस पर इमरान का कहना है कि ये सब एक इत्तेफाक है उनका इरादा जैक्सन की असमय हुई मौत को भुनाना नही था। क्योंकि ये वीडियों तो महीनो पहले ही बन चुका था।

"लक" की परीक्षा

Luck Movie बैनर: श्री अष्टविनायक सिनेविजन लिमिटेड
निर्माता: ढिलिन मेहता
निर्देशक: सोहम शाह
संगीत: सलीम-सुलैमान
कलाकार: संजय दत्त, इमरान खान, श्रुति के.हासन, मिथुन चक्रवर्ती, डैनी, रवि किशन, रति अगि्नहोत्री।

कहानी: फिल्म "लक" की कहानी राम मेहरा(इमरान खान)पर आघारित है। कई तरह की समस्याओं से घिरा राम आखिर एक दिन उस जगह पहुंच जाता है, जहां उसके पास ताकत है, साघन है, लेकिन अवसर नही है। इस दुर्भाग्य से वह बाहर निकलना चाहता है। कहा जाता है कि "तकदीर" तो वह है, जब अवसर आपके द्वार खटखटाए और आप उसका जवाब दे। ऎसा ही कुछ राम के साथ होता है। जैसे ही वह अवसर स्वीकारता है, उसे अहसास होता है कि उसके पास इतनी बडी ताकत और क्षमता है कि वह आने वाली हर समस्या से निपट सके। लेकिन समस्याओं का अंत नही होता। बार-बार उसके "लक" की परीक्षा होती है। राम के लिए मूसा (संजय दत्त) लगातार समस्याएँ पैदा करता है। मूसा बहुत ही भाग्यशाली इंसान है। गैंबलिंग की दुनिया का वह सबसे बडा डॉन है। मूसा से मुकाबला करने में राम की रिटायर्ड मेजर (मिथुन चक्रवर्ती), कैदी(रवि किशन)के अलावा डैनी और चित्रांशी की मदद मिलती है। पैसठ दिन में फिल्माई गई "लक" की शूटिंग दक्षिण अफ्रीका, बैकॉक और गोआ में हुई है। फिल्म "लक" के बारे में निर्देशक सोहम शाह का कहना है, कि लक एक थ्रिलर फिल्म है, जिसमें "लक" के जितने भी अर्थ और रूप हो सकते है उनका चित्रण किया गया है। "लक" बदलने के साथ ही इंसान की दुनिया बदल जाती है। कोई लॉटरी का टिकट जीतकर अपनी किस्मत बदल लेता है तो किसी के साथ दुर्घटना घट जाती है, और उसका बाल भी बांका नही होता। इसी को "लक" कहते है।