Tuesday, April 17, 2012
अमिताभ ने तेजा को शुभकामनाएं दीं
Saturday, October 22, 2011
बच्चन : मैं और मेरी तन्हाई, अक्सर ये बातें करते हैं
राज कपूर, दिलीप कुमार, देव आनन्द, राजेन्द्र कुमार, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, शत्रुƒन सिन्हा, विनोद मेहरा, मिथुन चक्रवर्ती, अनिल कपूर, सलमान, आमिर, शाहरूख, अक्षय, अजय देवगन, गोविंदा, ऋतिक, नील नितिन मुकेश और बहुत से नए कलाकार। फेहरिस्त और भी लम्बी है और बढती जायेगी पर एक नाम है जो शायद जस का तस है अमिताभ हरिवंश राय बच्चन जिसे कोई कुमार, कोई खान और कोई कपूर बॉलीवुड की बादशाहत की कुर्सी से डिगा नही पाया है। ना जाने क्यों इतने अच्छे-अच्छे कलाकार जब अमिताभ के साथ काम करते हैं या खडे होते हैं तो तुलना करना अतिशयोक्ति लगती है। कद ऊंचा होने के साथ-साथ उनका बडप्पन, उनकी सादी जीवन शैली, जमीन से जुडे रहना, उनकी नेक नियत, सादा स्वभाव और मृदुभाषी होना उन्हें और भी बडा बना देता है। ताज्जुब नहीं की अगर मीडिया उन्हें बॉलीवुड का शहंशाह या बॉलीवुड का बाप कहे।
1975 का वर्ष ऎसा वर्ष था जो जितना अमिताभ बच्चन के लिए महत्वपूर्ण रहा, उतना ही हिन्दी फिल्म उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अमिताभ बच्चन की दो और फिल्में आई एक यश चोपडा के निर्देशन में बनी निर्माता गुलशन राय की दीवार और दूसरी निर्माता जी.पी. सिप्पी की शोले। यश चोपडा द्वारा निर्देशित फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन एंगी यंगमैन का जो चेहरा पेश किया, जो उनके बाद आने वाला हर युवा अदाकार आज तक परदे पर उतारता आ रहा है। इस फिल्म में उनके साथ थे शशि कपूर, निरूपा राय, नीतू सिंह और परवीन बॉबी।
1988 में तीन साल की छोटी सी राजनीतिक अवधि के बाद अमिताभ बच्चन ने फिल्मों में वापसी की। उनकी वापसी की पहली फिल्म थी “शंहशाह” जिसे टीनू आनन्द ने निर्देशित किया था। अमिताभ के प्रति दर्शकों की कितनी दीवानगी थी यह “शहंशाह” के प्रदर्शन वक्त पता चला था। जयपुर जैसे शहर में जब यह फिल्म प्रदर्शित हुई थी, तब वहां एक नया रिकॉर्ड कायम हुआ था। यह पहली ऎसी फिल्म थी जिसे उस समय जयपुर के छह सिनेमा हॉलों में प्रदर्शित किया गया था और जिसका प्रथम शो प्रात: 6 बजे अम्बर सिनेमा (जो अब बन्द हो चुका है) में दिखाया गया था। इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों ने पूरी रात इंतजार किया था।
संस्कारों में मिले अंतिम क्षण तक लडने की क्षमता की वजह से यह अदाकार बीसवीं सदी के अंतिम वर्षो में नए सिरे से निर्माता-निर्देशकों के यहां स्वयं के लिए काम मांगने लगा। उन दिनों उभर चुके सितारों की वजह से अमिताभ को अनदेखा किया जाने लगा लेकिन एक शख्स ने उन्हें फिर से गले लगाया। यह वह शख्स था जिसने अमिताभ के साथ अपने समय की किवदंती बन चुकी फिल्मों- दीवार, कभी-कभी, सिलसिला, काला पत्थर इत्यादि का निर्देशन किया था- यह थे बॉलीवुड के प्रेम गुरू यश चोपडा जिन्होंने उन्हें अपने बेटे द्वारा निर्देशित होने वाली दूसरी फिल्म मोहब्बते में उस समय के सुपर सितारे शाहरूख खान के सामने एक दमदार रोल में पेश किया।
टीवी चैनल ने इस गेम शो को कुछ इस तरह से प्रचारित किया जिसने अमिताभ को घर-घर में वो शोहरत दिलायी जितनी उन्होंने अपने करियर में भी प्राप्त नहीं की थी। केबीसी की सफलता ने अमिताभ में आत्मविश्वास फूंका जिससे उन्होंने बडे परदे पर सफलतापूर्वक अपनी दूसरी पारी को परवान चढाया। करोडपति के बाद अमिताभ ने फिल्मों में फिर से कामयाबी पायी। उनकी इस सफलता को देखकर उन्हें सम्पूर्ण विश्व में सदी का महानायक चुना गया। इस दौरान उन्होंने एक रिश्ता-द बाण्ड ऑफ लव, आंखें, वक्त, खाकी, फैमिली, कांटे, शूट आउट एट लोखण्डवाला, वीरजारा, पहेली के साथ कई ऎसी फिल्में दी जिन्होंने उन्हें न सिर्फ आर्थिक तौर पर मजबूत किया बल्कि बॉलीवुड के कुछ पुराने सितारों को भी वापसी के लिए बाध्य किया। इनमें प्रमुख थे धर्मेन्द्र और राजेश खन्ना।
अमिताभ ने 2000 से हुई अपनी वापसी के बाद हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। चाहे वह विज्ञापन जगत हो, टीवी हो या फिर फिल्म निर्माण हो, उन्होंने बेहतरीन काम किया है। अमिताभ के कायल निर्देशक उम्र को दरकिनार करते हुए उनके लिए विशेष किरदार लिखते हैं और बतौर नायक उन्हें अपनी फिल्म में लेकर सफलता का नया इतिहास लिखते हैं। जिक्र करना चाहेंगे निर्देशक आर.बालाकृष्णन अर्थात् आर. बाल्की का जिन्होंने उन्हें नायक लेकर तब्बू के साथ चीनी कम और विद्या बालन व अभिषेक के साथ पा जैसी उत्कृष्ट फिल्मों में पेश किया।
अभिनय के अलावा अमिताभ ने पाश्र्व गायक, फिल्म निर्माता, टीवी प्रस्तोता और भारतीय संसद के एक निर्वाचित सदस्य भी रहे हैं। 2005 में उन्हें आंतो की समस्या के वजह से हॉस्पिटल में भरती किया गया।
बतौर निर्माता उनकी फिल्में हैं – तेरे मेरे सपने, उलासाम, मृत्युदाता, मेजर साब, अक्स, विरूद्ध, फैमिली। बतौर पाश्र्व गायक उनकी फिल्में हैं – द ग्रेट गैम्बलर, मि0 नटवरलाल, लावारिस, नसीब, सिलसिला, महान, पुकार, शराबी, तूफान, जादूगर, खुदागवाह, मेजर साब, सूर्यवंशम, अक्स, कभी ख़ुशी कभी गम, आंखें, अरमान, बागबान, देव, एतबार, बाबुल, निशब्द, चीनी कम, भूतनाथ।
Tuesday, July 5, 2011
अमिताभ बच्चन : दूसरा कोई नहीं . . .
अपने मित्र स्वर्गीय राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में अपना भाग्य आजमाने निकले इस अभिनेता के लिए राजनीति निराशाजनक रही। उन पर बोफोर्स तोप सौदे में दलाली का आरोप लगा। इस आरोप से उबरने में अमिताभ को लम्बा वक्त लगा, जिसने उनके फिल्मी करियर को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया।
संस्कारों में मिले अंतिम क्षण तक लडने की क्षमता की वजह से यह अदाकार बीसवीं सदी के अंतिम वर्षो में नए सिरे से निर्माता-निर्देशकों के यहां स्वयं के लिए काम मांगने लगा। उन दिनों उभर चुके सितारों की वजह से अमिताभ को अनदेखा किया जाने लगा लेकिन एक शख्स ने उन्हें फिर से गले लगाया। यह वह शख्स था जिसने अमिताभ के साथ अपने समय की किवदंती बन चुकी फिल्मों- दीवार, कभी-कभी, सिलसिला, काला पत्थर इत्यादि का निर्देशन किया था- यह थे बॉलीवुड के प्रेम गुरू यश चोपडा जिन्होंने उन्हें अपने बेटे द्वारा निर्देशित होने वाली दूसरी फिल्म मोहब्बते में उस समय के सुपर सितारे शाहरूख खान के सामने एक दमदार रोल में पेश किया।
मोहब्बते के किरदार के बाद बॉलीवुड का ध्यान फिर से अमिताभ बच्चन की तरफ गया और निर्देशकों को लगा कि उन्होंने अमिताभ को ठुकरा कर अच्छा नहीं किया। कर्ज के बोझ तले दबे अमिताभ बच्चन ने घर को संभालने और कर्ज को उतारने के लिए अपने परिजनों के विरोध के बावजूद छोटे परदे पर उतरने का निर्णय किया। इस बात को लेकर उनके परिजनों में कुछ मनमुटाव भी हुआ। एक बार तो उन्होंने भी सोचा कि इससे मेरा करियर बिलकुल खत्म हो जाएगा लेकिन अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की अगि्नपथ की कविता को याद करते हुए उन्होंने टीवी के लिए पहला कार्यक्रम पेश किया कौन बनेगा करोडपति।
करोडपति के बाद अमिताभ ने फिल्मों में फिर से कामयाबी पायी। उनकी इस सफलता को देखकर उन्हें सम्पूर्ण विश्व में सदी का महानायक चुना गया। इस दौरान उन्होंने एक रिश्ता-द बाण्ड ऑफ लव, आंखें, वक्त, खाकी, फैमिली, कांटे, शूट आउट एट लोहखण्डवाला, वीरजारा, पहेली के साथ कई ऎसी फिल्में दी जिन्होंने उन्हें न सिर्फ आर्थिक तौर पर मजबूत किया बल्कि बॉलीवुड के कुछ पुराने सितारों को भी वापसी के लिए बाध्य किया। इनमें प्रमुख थे धर्मेन्द्र और राजेश खन्ना।
राजेश खन्ना ने ऋषि कपूर की आ अब लौट चलें से वापसी की थी लेकिन फिल्मी लेखक इस गुजरे सुपर स्टार के लिए किरदारों को लिखने में कामयाब न हो पाए। केबीसी को अमिताभ ने जिस अंदाज में पेश किया और कर रहे हैं वह अपने आप में बॉलीवुड के उन सितारों के लिए एक मिसाल है जो अन्य कार्यक्रमों के प्रस्तोता हैं। अमिताभ ने गरिमामय अंदाज में केबीसी को प्रस्तुत किया है। वे अपने प्रतिभागियों के साथ जिस आत्मीयता और बुर्जुग की तरह व्यवहार करते हैं वह प्रतिभागी को न सिर्फ प्रोत्साहित करता है वरन् उसमें एक नई ऊर्जा भर देता है।
केबीसी के दूसरे संस्करण को मीडिया द्वारा अमिताभ के घोर प्रतिद्वंद्वी करार दिए गए शाहरूख ने पेश किया था लेकिन वे इसके पहले भाग का दस प्रतिशत भी दर्शकों को अपने साथ नहीं जोड पाए, इसी वजह से इस कार्यक्रम की सीमित कडियां पेश की गई। अमिताभ ने 2000 से हुई अपनी वापसी के बाद हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। चाहे वह विज्ञापन जगत हो, टीवी हो या फिर फिल्म निर्माण हो, उन्होंने बेहतरीन काम किया है। अमिताभ के कायल निर्देशक उम्र को दरकिनार करते हुए उनके लिए विशेष किरदार लिखते हैं और बतौर नायक उन्हें अपनी फिल्म में लेकर सफलता का नया इतिहास लिखते हैं।
जिक्र करना चाहेंगे निर्देशक आर.बालाकृष्णन अर्थात् आर. बाल्की का जिन्होंने उन्हें नायक लेकर तब्बू के साथ चीनी कम और विद्या बालन व अभिषेक के साथ पा जैसी उत्कृष्ट फिल्मों में पेश किया।
चीनी कम का कथानक भारतीय समाज में प्रचलित शादी ब्याह में उम्र को लेकर रचा गया करारा व्यंग्य था। यह फिल्म इस मिथक को तोडने का एक सराहनीय प्रयास था। इसके बाद आर.बाल्की ने उन्हें पा के उस किरदार में लिया जिसे करने के लिए शायद ही कोई अभिनेता तैयार होता। अमिताभ ने न सिर्फ ये किरदार निभाया बल्कि इस फिल्म का निर्माण भी उन्होंने स्वयं ही किया। इस फिल्म के लिए उन्हें पुरस्कारों से लाद दिया गया था।
कभी अगि्नपथ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले इस अभिनेता ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने वाली समिति की विचारधारा में बदलाव लाने का प्रयास किया। इसी का नतीजा है कि आज सलमान खान की दबंग को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जा रहा है।
बुड्ढा होगा तेरा बाप को देखकर निश्चित रूप से कहना चाहेंगे कि बॉलीवुड में चल रही परिवर्तन की लहर को इस फिल्म के बाद बढावा मिलेगा। इस वक्त जो नए लेखक निर्देशक सीमित दर्शकों को ध्यान में रखकर फिल्में बना रहे हैं उन्हें अपनी सोच को बदलते हुए आम जनता के हिसाब से फिल्मों को बनाने का निर्णय करना पडेगा। इसमें आमिर खान को शामिल होना पडेगा जो कहते हैं कि मेरी फिल्में बिलकुल अलग दर्शक वर्ग के लिए होती हैं।
यह सही है कि ऎसा है लेकिन आम आदमी की जिन्दगी में बढते तनाव और आर्थिक दबाव के दौर में इस प्रकार की फिल्में वक्ती तौर पर तो सफलता प्राप्त कर सकती हैं लेकिन उस दर्शक वर्ग को अपने साथ नहीं जोड सकती है जो अपने तनाव और दबाव भरी जिन्दगी में कुछ पलों के लिए मुक्त होना चाहता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि 68 वष्ाीüय इस युवा की ऊर्जा को देखकर कई शख्स स्वयं में नई स्फूर्ति को महसूस करें और खामोश पडी जिन्दगी को उत्साह के साथ जीने की शुरूआत करें।
फिलहाल इतना ही काफी है। आगे आपके विचारों के बाद हम विस्तृत रूप से अमिताभ बच्वन के ऊपर चर्चा करेंगे।
Thursday, October 7, 2010
रैम्प पर उतरे अमिताभ,ऋतिक, शाहरूख ने चुराया दिल
बॉलीवुड के दो करिश्माई कलाकार अमिताभ बच्चान और ऋतिक रोशन यहां चल रहे "एचडीआईएल-इंडिया काउचर वीक" में डिजाइनर करन जौहर और वरूण बहल के संग्रह के लिए शोस्टॉपर बने लेकिन शाहरूख खान ने अपनी मधुर मुस्कान से वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया।
बिग बी और ऋतिक गुरूवार शाम रैम्प पर उतरे और उनके आकर्षक व्यक्तित्व ने समां बांध दिया था। अमिताभ काले रंग के ओवरकोट में नजर आए तो ऋतिक मिलिट्री जैकेट में दिखे। दोनों कलाकारों के रैम्प पर उतरने के बाद डिजाइनर करन ने दर्शकों की पहली पंक्ति में बैठे शाहरूख को भी रैम्प पर बुलाया। इस पर खुद अमिताभ ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर दर्शकों के बीच बैठे शाहरूख को मंच पर खींच लिया। जब वहां मौजूद लोगों ने "कभी खुशी कभी गम" के तीनों कलाकारों को रैम्प पर एक साथ चलते देखा तो पूरा माहौल तालियों की ग़डग़डाहट से गूंज उठा। शाहरूख ने अमिताभ और ऋतिक को गले लगाया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। दर्शकों में बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा, करिश्मा वकरीना कपूर, सैफ अली खान, अनिल कपूर, सोनम कपूर, रानी मुखर्जी, शाहरूख की पत्नी गौरी, ऋतिक की पत्नी सुजान, उर्मिला मातोंडकर, रवीना टंडन, राहुल खन्ना, डीनो मोरिया भी मौजूद थे।
Thursday, September 16, 2010
हिन्दी से मुझे विशेष पहचान मिली: अमिताभ
बॉलीवुड के बादशाह अमिताभ बच्चन ने हिंदी दिवस के अवसर पर कहा कि हिंदी ऎसी भाषा है जिसमें उन्होंने सबसे पहले काम किया और इससे उन्हें एक विशेष पहचान मिली है। अमिताभ ने हिन्दी दिवस के अवसर पर सभी हिन्दी प्रेमी लोगों को बधाई देते हुए अपने ब्लॉग में कहा, मैं अपने सभी पाठकों को इस शुभ दिन की बधाई देता हूं।
अमिताभ ने कहा, हिन्दी मेरी मातृभाषा है। इसे बोलते हुए मैं पला बढा हूं। यह वह भाषा है जिसमें सबसे पहले मैंने काम किया। यह मेरी विशेष पहचान की भाषा है। उन्होंने कहा, हालाकि अगर ठीक से कहे तो मेरी मातृ भाषा पजांबी है क्योंकि मेरे मां की मातृ भाषा पंजाबी थी। वह एक सिख महिला थी। लेकिन शादी के बाद उन्होंने हिन्दी को पूरी तरह से अपना लिया। अमिताभ ने कहा कि हिन्दी उनके पिता हरिवंश राय बच्चान के मां की मातृ जबान थी। आज हिन्दी दिवस के अवसर पर हमें उप महाद्वीप कहे जाने वाले भारत की सभी मातृ भाषाओं के महत्व का उत्सव मनाना चाहिए।
Saturday, September 4, 2010
अगले अमिताभ हो सकते हैं रणबीर : सिद्धार्थ
दो फिल्मों में रणबीर कपूर के साथ काम करने के बाद निर्देशक सिद्धार्थ आनंद महसूस करते हैं कि इस युवा अभिनेता में महानायक अमिताभ बच्चन के पदचिन्हों पर चलने और एक संपूर्ण भारतीय फिल्मी हीरो बनने की योग्यता है। वह कहते हैं, ""रणबीर ने जिस दिन एक्शन फिल्म में काम किया था और बेहतर काम किया था उसी दिन समझ आ गया था कि उनमें अमिताभ की खाली हुई जगह को भरने की क्षमता है।"" रणबीर अभिनीत सिद्धार्थ की नई फिल्म "अंजाना अंजानी" 24 सितंबर को प्रदर्शित होगी। इससे पहले रणबीर ने सिद्धार्थ की फिल्म "बचना ए हसीनों" (2008) में भी अभिनय किया था। 27 वर्षीय रणबीर प्रख्यात बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर और अभिनेत्री नीतू कपूर के बेटे हैं। सिद्धार्थ ने कहा, ""रणबीर एंथनी ("अमर अकबर एंथनी" फिल्म में अमिताभ का किरदार) का किरदार निभाने के लिए एकदम सही कलाकार हैं,
वह कुली की भूमिका कर सकते हैं, वह वे सभी भूमिकाएं कर सकते हैं जो अमिताभ की अच्छी भूमिकाएं मानी जाती हैं। ऎसा कोई और कलाकार नहीं है लेकिन उनमें यह योग्यता है।"" वह कहते हैं कि हिंदी फिल्मों का एक पूर्ण हीरो बनने के लिए रणबीर में वह सब कुछ है जो अमिताभ में था। सिर्द्धाथ की नई फिल्म "अंजाना अंजानी" में रणबीर के साथ अभिनेत्री प्रियंका चोप़डा मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म के संबंध में बताते हुए उन्होंने कहा, """अंजाना अंजानी" दो अजनबियों की कहानी है जो अजनबी सी परिस्थितियों में मिलते हैं और अजनबी ही रहते हैं। इसलिए हिंदी फिल्म के लिए यह अनूठी कहानी है लेकिन यह एक व्यवसायिक हिंदी फिल्म है। इसमें गाने, कहानियां, खूबसूरत दृश्य और शानदार अभिनय किया गया है।"" फिल्म में प्रियंका को लिए जाने पर उन्होंने कहा, ""रणबीर एक बहुत अच्छे अभिनेता हैं, इसलिए मुझे ऎसी अभिनेत्री की जरूरत थी जो उनके साथ जंचे और प्रियंका इस भूमिका में बहुत बेहतरीन दिखी हैं।""
Tuesday, March 23, 2010
अभी भी अधूरे है अमिताभ के सपने
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चान की कुछ इच्छाएं ऎसी है जो आज भी पूरी नहीं हो पाई है। हालांकि अब वह अपने काम से थोडा समय निकालकर जल्द से जल्द इन इच्छाओं को पूरा करना चाहते है।
अमिताभ बताते है, कुछ समय पूर्व मुझे एक पियानो गिफ्ट में मिला था। मैंने अकेले में कई बार इसे बजाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। जब भी मैं इसे अपने घर में देखता हूं, मेरी इसे बजाने की इच्छा होने लगती है। ईश्वर ने चाहा तो मैं जल्द ही इसे बजाने लायक हो जाऊंगा। काफी समय पहले मैं पंडित रविशंकर का सितार सुना करता था। उस वक्त मैंने कई बार इस साज को बजाने की कोशिश की, लेकिन ऎसा नहीं हो पाया। मुझे लगता है कि अब अपने सपने को पूरा करने का वक्त आ गया है।
अमिताभ कुछ देसी-विदेशी भाषाएं भी सीखना चाहते है। इस बारे में उनका कहना है, मेरी चाहत है कि मैं फ्रेंच और स्पेनिश जैसी भाषाएं धाराप्रवाह से बोल सकूं। आज मैं इन्हे सीखना शुरू नहीं करता, तो फिर कभी नहीं सीख पाऊंगा। इसके अलावा मैं मलयालम भी बोलना चाहता हूं। मुझे बताया गया है कि यह बहुत मुश्किल भाषा है, लेकिन मैं इसे भी सीख ही लूंगा।
Wednesday, February 3, 2010
अमिताभ बच्चन ने की वेबसाइट लांच
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने कल यहां राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मराठी संगीत निर्देशक अजय और अतुल गोगावले की अधिकारिक वेबसाईट को लांच किया।
इस अवसर पर श्री बच्चन ने वेबसाइट के उद्घाटन से पूर्व अजय और अतुल को उनकी उपलब्धियां के लिए शुभकामनाएं दी। इससे पहले फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर एवं संगीतकार प्यारेलाल ने भी दोनों संगीत निर्देशकों को शुभकामनाएं दी। उल्लेखनीय है कि वेबसाइट में दोनों संगीत निर्देशकों से सम्बन्धित सम्पर्ण जानकारी उपलब्ध होगी।
इस वेबसाइट में दोनों के ब्लाग भी होगे जिसके माध्यम से उनके संगीत को प्रचारित करने का भी काम किया जाएगा। इस अवसर पर दोनों निर्देशकों ने 56 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह मे मराठी फिल्म जोगवा के लिए मिले उत्तम संगीत निर्देशन के राष्ट्रीय पुरस्कार की सफलता को पूरे उत्साह से मनाया। इस मौके पर पहुचे महराष्ट्र नव-निर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने भी दोनों निर्देशकों को अपनी शुभकामनाए दी।
Wednesday, January 27, 2010
मिथुन के कायल हुए अमिताभ
बॉलीवुड के अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी मिथुन चक्रवती की तरह अपनी जिदंगी की शुरूआत कभी कोलकाता की गुमनाम गलियों से ही की थी। एक टैलेंट हंट शो में मिथुन दा से हुई मुलाकात के बाद बिग बी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि मिथुन का संघर्ष और कामयाबी का उनका सफर कई लोगों को प्रेरणा देता है।
मिथुन के बारे में अमिताभ कहते है कि मिथुन दा अपनी सृजनशीलता के चरम पर है गुरू में उनके किरदार ने मुझे उनका कायल कर दिया। उन्होने लिखा है कि कुली वाले हादसे के दौरान उनकी सह्रदयता को मै कभी भी भूल नही सकता। मिथुन बिग बी के साथ अग्निपथ और दो अनजाने जैसी फिल्मों में काम कर चुके है।
दो अनजाने की शूटिंग के वाकये को याद करते हुए बिग बी ने ब्लॉग में लिखा है कि तब कोलकाता में इसकी शूटिंग चल रही थी और वह मेरा सामान उठाने के लिए बडे उत्साह से दौड पडते थे। मैने मिथुन दा को इसके लिए रोका भी लेकिन वह मेरी नही मानते थे। बिग बी कहते है कि मेरे प्रति उनका सम्मान आज भी बिलकुल वैसा ही है।
Thursday, January 21, 2010
रेखा को किया अनदेखा
एक ऎसे रिश्ते की जो कभी पूरा ही नहीं हो पाया। लेकिन उस रिश्ते के किरदार जब भी एक-दूसरें के सामने आए। दुनिया ने जानना चाहा कि किसने किसको देखा। किसने किससे क्या कहा जी हां. हम बात कर है रेखा और अमिताभ की। जो एक छत के नीचे आमने-सामने तो हुए लेकिन अमिताभ ने रेखा को नही देखा। लेकिन अभिषेक ने दूरियों की उस रेखा को मिटाने की कोशिश जरूर की।
दरअसल साल 2009 में जैसे ही रेखा अमिताभ के करीब पहुंची वो उठ के चले गए। वहीं इस साल साटर डस्ट अवाड्र्स में अमिताभ जब रेखा के सामने से गुजर तो रेखा की नजर टकटकी लगाएं अमिताभ को ही देखती रही। लेकिन अमिताभ ने उनकों इगनोर किया। लेकिन अभिषेक रूके और उन्होने रेखा को नमस्ते बोला।
Saturday, January 16, 2010
विदेश में कलर्स के ब्रांड एंबैसेडर अमिताभ होंगे
टेलीविजन चैनल क्लर्स ने बॉलीवुड के शंहशाह अभिताभ बच्चन को अमेरिका और ब्रिटेन में अपना ब्रांड एबेंसेडर नियुक्त किया है। कलर्स द्वारा अमेरिका और ब्रिटेन के लिए ब्रांड एंबैसेडर नियुक्त किए जाने पर अमिताभ ने खुशी जाहिर की है। उन्होने कहा कि रियलिटी शो बिंग बॉस 3 के जरिए वे इस मनोरंजन चैनल से जुडे थे।
अमिताभ ने मुख्य बयान जारी कर कहा कि मुझे यकीन है कि कलर्स अमेरिका और ब्रिटेन में लोकप्रिय साबित होगा। चैनल के साथ जुडकर मे सम्मानित महसूस कर रहा हूं। कसर्ल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कामत ने कहा कि अमिताभ के ब्रांड एंबैसेडर बनने से चैनल नई ऊंचाइयों को छुएगा। उन्होनें कहा कि अमिताभ देश के बाहर चैनल को नई पहचान देंगे।
Tuesday, January 12, 2010
बिग बी ने चुराया शाहरूख का खाना
आपने कभी सोचा है कि अमिताभ बच्चन कभी इतने मजबूर हो सकते है कि उन्हें खाना चुराना पड जाए, खाना भी बॉलीवुड के किंग शाहरूख खान का। जी हां, इसका खुलाशा खुद बिग बी ने किया। मौका था स्टार स्क्रीन अवॉड्र्स समारोह का, जहां बिग बी को तीन पत्ती फिल्म के प्रचार कार्यक्रम में हिस्सा लेना था।
इस सारी घटना का जिक्र अमिताभ बच्चान ने खुद अपने ब्लॉग में किया है। ब्लॉग में अमिताभ लिखते है कि मै सुबह जल्दी आया और तीन पत्ती के प्रमोशन के वास्ते तैयार होने के लिए अपने वैनिटी वैन चला गया। मुझे जोरो की भूख लगी थी। मै अपने वैन से बाहार आया और शाहरूख के वैन में घूस गया। वहां मैने शाहरूख के लंच में से कुछ सलाद चुराकर खाया। दरअसल अपनी बीमारी के बाद अमिताभ बच्चन खाने-पीने को लेकर काफी सतर्क रहते है। शूटिंग के दौरान भी वे घर का ही खाना खाते है।
Thursday, December 31, 2009
बिग बी ने किंग खान को पछाडा
फिल्म इंडस्ट्री में इस बात को लेकर जर्बदस्त चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चान ने बिग बॉस-3 के लिए प्रति एपिसोड 2.5 करोड लिये है।
गौरतलब है कि शुरूआत में यह रकम 1.5 करोड के आसपास तय बताई जा रही थीं। अक्षय कुमार को खतरों के खिलाडी के लिए और शाहरूख खान को उनके शो क्या आप पांचवीं पास से तेज है के लिए क्रमश: 1 करोड रूपये प्रति एपिसोड मिलें थे। वहीं दस का दम के लिए बॉलीवुड सितारे सलमान खान को पहले भाग के दौरान 80,00,000 रूपये और दूसरे सत्र के दौरान 1 करोड की राशि दी गई हैं।
अब इस पूरे गणित को देखें तो यह अपने आप साबित हो जाता है कि आज की तारीख में बॉलीवुड का असली बादशाह कौन है। निश्चित तौर पर इस मामले में तो अमिताभ बच्चन ने न केवल शाहरूख खान बल्कि अक्षय कुमार को भी मात दे दी है। जरा कल्पना करके देखिए तो सही आखिर अमिताभ बच्चान ने बिग बॉस-3 के दौरान आखिर कितनी कमाई की।
Wednesday, November 25, 2009
ईमानदार व्यक्ति है ओमपुरी: बिग बी
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने समकालीन अभिनेता ओमपुरी की विवादास्पद जीवनी का विमोचन करने के बाद उन्हें ईमानदार व्यक्ति की संज्ञा दी हैं। किताब के विमोचन समारोह में पुरी ने अपने जीवन के बारे में बहुत सी बातों का जिक्र किया था। समारोह का विवरण देते हुए बिग बी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि बहुत से दर्शकों का सामना करना सुविधाजनक स्थितियों में भी किसी के लिए भी कठिन काम हो सकता हैं, लेकिन ओम पुरी के बारे में मुझे कहना पडेगा कि यह उनके जीवन की सबसे साहस वाली शाम थीं।
"ओम पुरी: इन अनलाइकली हीरो" नाम की किताब उनकी पत्रकार पत्नी नंदिता पुरी ने लिखी हैं, जिसमें उनके कई महिलाओं के साथ संबंधों के बारे में जिक्र हैं। बिग बी ने लिखा है, अपनी जिंदगी के बारे में ईमानदारी से बताते हुए ओमपुरी का गला रूंध गया, इतनी ईमानदारी, जो शायद हम में कभी न आ पाए। बिग बी ने इस बारे में भी मजाक किया कि वह मुंबई में सबसे लोकप्रिय किताब का विमोचन करने वाले बन गए हैं। अगले कुछ दिनों में अमिताभ अपने पिता हरिवंश राय बच्चान की नए रंग में पेश होने वाली किताब "मधुशाला" का भी विमोचन करने वाले हैं।
Monday, November 23, 2009
गर्व से कहूंगी कि बिग बी मेरे पहले बच्चे हैं: विद्या बालन
फिल्म "पा" में बिग बी यानी अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका निभाने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने कहा कि अब वह सभी को गर्व से कह सकेंगी कि बिग बी उनके पहले बच्चे हैं।
बालन ने कहा, इस भूमिका को निभाने के बाद मैं गर्व से अपने बच्चों को कह सकूंगी कि बिग बी मेरे पहले बच्चे हैं। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी बॉलीवुड के इस महान कलाकार की मां की भूमिका निभाऊंगी। उन्होंने कहा, बच्चनजी के साथ काम करने का बहुत ही बढिया अनुभव रहा। मेरे लिए यह एक विशेष फिल्म हैं। फिल्म "पा" में बालन और अभिषेक बच्चन की जोडी हैं। पिता-पुत्र के भावनात्मक संबंधों पर यह फिल्म आधारित हैं।
Tuesday, November 17, 2009
अमिताभ की पत्नी बनेंगी लारा
प्रीतिश नंदी कम्यूनिकेशन के बैनर तले बनने वाली फिल्म में अभिनेत्री लारा दत्ता बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की पत्नी का रोल निभाएंगी। सूत्रों के अनुसार इस फिल्म में अमिताभ एक असफल अभिनेता का किरदार निभा रहे हैं जो लगातार मिल रही असफलता से तंग आ चुका हैं।
यह किरदार सब कुछ छोडकर अपनी पत्नी के साथ समाज से दूर एकांत में चला जाता हैं। इस फिल्म में अमिताभ एक कमजोर मानस वाले व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में लारा का किरदार एक सशक्त स्त्री का है जो सुंदर होने के साथ ही इंटेलिजेंट भी हैं। वो अपने पति को अच्छी तरह समझती हैं साथ ही उसकी विफलता में उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए उसका मनोबल बढाती हैं। लारा इस फिल्म में अपने रोल को चुनौतीपुर्ण बता रही हैं। सूत्रों का कहना है कि अमिताभ को पहले फिल्म की कहानी पसंद नहीं आई और उन्होंने फिल्म करने से मना कर दिया था।
लेकिन बातचीत के बाद अब वो फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गए हैं। कहा जा रहा हैं कि इस फिल्म की कहानी अमिताभ को ध्यान में रखकर ही लिखी गई हैं। प्रीतिश नंदी के पुत्र कुशल ने फिल्म की कहानी लिखी हैं। इस फिल्म की कहानी अमिताभ को ध्यान में रखकर ही नजर आएंगी। यह फिल्म अगले साल तक पर्दे पर आएगी।
Thursday, November 12, 2009
बाल दिवस पर टीवी पर ओरो के रूप में दिखेंगे अमिताभ
फिल्म "पा" के प्रदर्शन से पहले बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन बाल दिवस के अवसर पर टेलीविजन पर "ओरो" के रूप में नजर आएंगे। इस फिल्म में अमिताभ ने प्रोगेरिया बीमारी से पीडित 13 साल के बच्चे "ओरो" का किरदार निभाया हैं। ओरो के रूप में अमिताभ बच्चों के लिए एक बहुत विशेष संदेश देंगे। फिल्म की निर्माण कंपनी एबी कोर्प लिमिटेड की पहल पर विश्वभर के बच्चों को अमिताभ के किरदार से जोडने के लिए ऎसा किया जा रहा हैं। अमिताभ के प्रशंसकों को फिल्म में खेलने के लिए इस्तेमाल की गई गुडियाओं सहित उनके द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं भी मिलेगी। निर्देशक आर. बालकृष्णन ने बताया, फिल्म "पा" मुख्य रूप से बच्चों और अभिभावकों दोनों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। बच्चन का किरदार ओरो उम्र बढने संबंधी दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त हैं।
ओरो आसानी से अकेला हो सकता हैं, उसे अलग किया या छोडा जा सकता हैं। प्रोगेरिया रिसर्च फांउडेशन के लिए कोष इकट्ठा करने के लिए "पा" के विशेष शो करने की योजना हैं। बालकृष्णन ने कहा, हमारे पास प्रोगेरिया फाउंडेशन के साथ सहयोग की वास्तव में कोई ठोस योजना नहीं हैं। यद्यपि हमारा नाटक इस बीमारी से ग्रस्त हैं लेकिन फिल्म प्रोगेरिया के संबंध में नहीं हैं। यह फिल्म बताती हैं कि कैसे ऎसे विशेष बच्चे आपके जीवन को विशेष प्रकाश से भर देते हैं।
Friday, November 6, 2009
मीडिया को धन्यवाद देता हूं अमिताभ
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने फिल्म "पा" के प्रोमो प्रदर्शित होने के बाद प्रोमो देखकर लौटे पूरे मीडिया जगत को धन्यवाद दिया हैं। अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि "पा" पर आधारित किताब और प्रोमो अभिषेक ने जारी कर दिए। इसके बाद से प्रेस द्वारा फिल्म के भेजे जा रहे प्रशंसा भरे संदेश थमने का नाम नहीं ले रहे।
उन्होंने लिखा हैं, मैंने आज (शुक्रवार) का पूरा दिन मीडिया के नाम कर दिया हैं। सहज दिल से प्रदर्शित उनके स्नेह, प्यार और प्रोत्साहन के लिए मैं उनका व्यक्तिगत तौर पर धन्यवाद देता हूं। "पा" के लिए उन्होंने हमें जो सकारात्मक मजबूती दी और हम पर जो भरोसा जताया, उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद कहना चाहता हूं। अमिताभ ने लिखा, भावनाओं के इस अनियंत्रित आवेग में असफलताएं, नकारात्मकता, कुंठित टिप्पणियां, गलत आरोप और उनसे उपजी मानसिक परेशानियां, गुस्सा और तनाव सभी कुछ फीका पड जाता हैं।
अमिताभ ने की पिता अभिषेक की सवारी
फिल्म "पा" के निर्देशक आर.बाल्की के लिए यह बहुत राहत वाली बात रही कि अभिनेता अभिषेक बच्चन ने फिल्म के लिए वास्तविक जीवन के उलट अपने पिता अमिताभ बच्चन को पीठ पर उठाकर एक विस्तृत क्षेत्र में चलने का दृश्य सहजता से पूरा कर लिया।
बाल्की ने कहा, अभिषेक ने एक बार में ही यह दृश्य पूरा कर लिया था। वह अपने पिता को बिना किसी खास प्रयास के विस्तृत क्षेत्र में एक जगह से दूसरी जगह ले गए। हमने यह दृश्य इंग्लैंड में कैम्ब्रिज के निकट बरी सेंट एडमंड्स से फिल्माया था। अभिषेक अपने लोगों की भीड से दूर रहना भी एक कारण था। जब अभिषेक, अमिताभ को अपनी पीठ पर उठाकर चल रहे थे तो अमिताभ ने कैसा महसूस किया पूछने पर अमिताभ ने चुटकी लेते हुए कहा, मुझे पीठ पर उठाकर चलना अभिषेक का काम था। जया और मैंने एक मजबूत बेटे को पैदा किया हैं।
अमिताभ ने कहा, फिल्म में 12 वर्षीय बच्चे का किरदार करने में सबसे थका देने वाला हिस्सा मेकअप वाला था। मुझे हर सुबह बिना हिलेडुले, कुछ खाए बिना और यहां तक कि पानी पिए बिना चार-पांच घंटे तक एक स्थान पर बैठे रहना पडता था। सुबह का दृश्य फिल्माने के लिए मुझे पिछली रात के 11 बजे से ही तैयार रहना पडता था ताकि अगले दिन शूटिंग का समय होने तक मेकअप पूरा हो जाए।
Monday, November 2, 2009
पिता जी को 101वें जन्मदिन पर बिग बी देगे अनूठा तोहफा
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने 18 जनवरी को पिता और विख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन का 101वां जन्म दिवस मनाने के लिए काफी तैयारियां की हैं। इनमें उनके पिता की चर्चित पुस्तक "मधुशाला" का पुनर्विमोचन और एक नृत्य कार्यक्रम का आयोजन शामिल हैं। अमिताभ ने अपने ब्लॉग "बिग बी डॉट बिग अड्डा डॉट कॉम" पर लिखा हैं, पिता के 101वें जन्म दिवस को मनाने को लेकर चर्चाएं जारी हैं। मधुशाला को नए रूप में पेश करने के अलावा पिता के रचनात्मक कार्यो की यात्रा को नृत्य व गायन के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।
अमिताभ कहते है कि वह अपने दिवंगत पिता की कुछ बेहद महत्वपूर्ण रचनाओं को भी प्रकाशित करवाएंगे। दिवंगत लेखक धर्मवीर भारती की पत्नी पुष्पा भारती ने इन रचनाओं को संग्रहित किया हैं। 67 वर्षीय अभिनेता लंबे समय से इसके लिए योजना बना रहे है और मधुशाला के नए संस्करण के लिए भूमिका लिखने में विशेषतौर पर ज्यादा समय दे रहे हैं। 1935 में प्रकाशित मधुशाला को हरिवंश राय बच्चन की सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती हैं।
इस पुस्तक का नवीनतम संस्करण एक बडी सी कॉफी टेबल के आकार जितना बडा होगा। इसमें दिवंगत कवि की यर्थाथवादी कविताएं और उनका अंग्रेजी अनुवाद होगा। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के मारजोरी बॉउल्टन ने इन कविताओं का अनुवाद किया हैं। किताब में अमिताभ की भतीजी नमृता बच्चन की बनाई पेंटिंग्स भी होगी। अमिताभ का कहना है, किताब में शामिल पेंटिंग्स अनूठी हैं और उम्मीद है कि लिखी गई भूमिका मेरे पिताजी की 101वें जन्म दिवस पर दिए जाने वाले सम्मान के अनुरूप होगी।